कर्म योग समर्पण
कर्म योग: भारतीय संस्कृति में समर्पण की उच्चतम शिखर योग एक प्राचीन भारतीय विचारधारा है, जिसने विश्वभर में आदर्श और मान्यता प्राप्त की है। योग के विभिन्न प्रकारों में से एक है "कर्म योग"। कर्म योग का अर्थ होता है कर्मों के माध्यम से मन को नियंत्रित करना और अपनी आत्मा को परमात्मा के साथ मिलाने का प्रयास करना। यह अपने कार्यों को निष्काम भाव से करने के सिद्धांत पर आधारित होता है। कर्म योग का मूल मार्ग कर्म करते समय मन की भावनाओं, इच्छाओं और आवश्यकताओं को संतुलित रखने में स्थित है। इसका लक्ष्य मन की अस्थिरता को दूर करके स्थिरता और शांति को प्राप्त करना है। कर्म योग में मनुष्य को अपने कर्मों के फलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि कर्मों को समर्पित करना चाहिए। कर्म योग का सिद्धांत मनुष्य को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने को सिखाता है। यह मनुष्य को स्वार्थ और अहंकार से दूर रखने की शिक्षा देता है और उसे समाजसेवा और सहायता में लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। कर्म योग में कर्मचारी को अपने कर्तव्यों का पालन करने के साथ-साथ न्याय, सम्मान, सहानुभूति, दया और सेवा की भावना से कार...